LAKSHYA/लक्ष्य

बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते,कभी गौर करना तब,जब बच्चों के पाँवधरती पर पड़ते।बीज शांत तबतक,जबतक गर्भ में होते,अंकुरण का देर,फिर तो पल-पल ही बढ़ते,अंकुर को वृक्ष होते देर नही लगते,बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते।छोड़ दो बहलाना खुद को,किस बाग को,सजाना सोचो,वृक्ष तो स्थिर,तेरे पाँव,किधर जाना सोचो,ख्वाब गर बदले,मंजिल बदल जाएगी,पलभर की चूक,रण-निर्णय बदल जाएगी,भगीरथ प्रयास […]

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