अफसाने तेरे पन्नों में…..!!!!

मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है कि मेरे प्रिय ब्लॉगर,मित्र,वर्डप्रेस के हमारे परिवार Shanky आशीष जी के सराहनीय प्रयास से हमारी 40 कविताओं वाली किताब जिसका नाम “अफ़साने तेरे पन्नों में” का प्रकाशन हुआ है। जिसमे आप सभी ब्लॉगर मित्र भाईयों का भी कम सराहनीय योगदान नही। अगर आप लोग हमारा निरन्तर हौसला […]

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CHUPPI/चुप्पी

सुना है श्रद्धा हो मन में तो रबपत्थर में मिल जाते हैं,प्रेम की भाषा इंसां क्या,पशु-पक्षी,जानवर भी समझ जाते हैं,माँ खुश होती,जब बच्चा दूध पी लेता,दानी खुश होता जब जरूरतमंद को कुछ दे देता,प्रफुल्लित होती नदियाँ,किसी की प्यास मिटाकर,झूम उठते वृक्ष,अपना फल खिलाकर,हिम ना पिघलता,नदियों का कोई वजूद नही होता,तुम ना होते,इन शब्दों का भीकोई […]

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UMMID/उम्मीद

सजल नैन,बालम परदेस,दशा डराए। बंद शहर,कोरोना का कहर,नींद न आए। अस्थिर मन,हिमालय सा अटल,किसे दिखाएँ। आह!नियति,संकट में है प्राण,कोई बचाए। रब की पूजा,करते निशदिन,चैन ना आए। बंद झरोखे,गरजते बादल,हवा डराए। ढाढ़स देते,आएगा मधुमास,लोग जो आए। अकेलापन,अपनो की है भीड़,कौन हँसाए। !!!मधुसूदन!!१

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Majduron ka kaun?/मजदूरों का कौन?

आज मजदूरों की भयावह स्थिति हो गई है। मकान मालिक किराये नही छोड़ रहे, कार्यस्थल पर ताले जड़े, मालिक तनख्वाह नही दे रहा, सरकार की सहायता उन तक पहुंचना मुश्किल,सारे वादे और उसे पूर्ण करनेवाले सियासत में मशगूल,अपने पूरे परिवार,बच्चों संग पैदल चलने को विवश मजदूर।सरकार के पास मौका था उन्हें अपने घर तक पहुंचा […]

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Lock-down/लॉक-डाउन

लॉक डाउन,मगर कुछ भी नही ठहरा,ना वक्त,ना जिंदगी,और ना ही मौत!हम भी कहाँ ठहरे,किसी के कदम चल रहे,किसी के कलम,किसी के आँसूं,और किसी की राजनीत!यूँ कहें तोलॉक डाउन है,मगर जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा बेचैन है,और बेचैन है,वक़्त,मौत,कलम,पांव,आँसूऔर राजनीति भी पहले से कहीं ज्यादा!!!!मधुसूदन!!!

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BEBAS MAJDOOR/बेबस मजदूर

दर्दे-गम बहुत है गिनाऊँ कैसे,मजबूर हुआ खुद को बचाऊँ कैसे। हल,कुदाल,घन,चक्की चलाते,तपती हुई भट्ठी में तन को गलाते,टप-टप पसीने टपकते रहे,जलता लहू फिर भी हँसते रहे,मजदूर हूँ खुद को मजबूर नही माना,भीख किसे कहते हैं मैंने नही जानास्वाभिमानी हम भी,स्वाभिमान दिखाऊँ कैसे,मजबूर हुआ खुद को बचाऊँ कैसे। खाते में व्यापारी तनख्वाह नही डालते,शोषण कितना,क्या बताऊँ,क्या […]

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MAA/माँ

आज मशीनी युग,कल ढेकी,चक्की का दौर,हुक्मउदूली ना हो जाए,दौड़ती चहुँओर,वैसे तेरे ममत्व,वात्सल्य,त्याग की तुलना बेमानी है,मगर जो मेरे आँखों के सामनेचलचित्र की भांतिदौड़तीउसकी दास्ताँ पुरानी है,आज डायपर,बिजली पंखों का काल,कल भींगे बिस्तर और ठिठुरन भरी रात,न जाने कितनी रात तुम जागकर बिताई होगी,सूखे बिस्तर पर हमें सुलाकर,न जाने कैसे,गीले बिस्तर पर तुझे नींद आई होगी!बचपन,जब […]

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MAA/माँ

माँ, तूँ पास ना होकर भी समीप है,कैसे कहूँ तूँ कितना करीब है,जब भी कोई दुख होता,सह लेते,ये सोचकर कि तुम दूर होमगर हो तो सही,एक आवाज,और दौड़ी चली आओगी,माँ,पता है,आज मदर डे है,तुझे याद करने का दिन!हमें नही पता ये दिन किसने बनाए,हमें ये भी नही पता,वो कौन सा क्षण जब हम तुझे भूल […]

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ANKHEN/आँखें

मेरे प्रिय मित्र,भाई और ब्लॉगर निमिष जी ने अपने ब्लॉग पर एक कविता प्रकाशित की जिसका शीर्षक है “आँखें” जिसे पढ़ कुछ शब्द निकल पड़े। प्रस्तुत है:- पता नही पर्वत की चोटी पर जमी बर्फ कैसे पिघली,और कैसे उसे सहेज असंख्य पत्थरों,चट्टानों को लांघते,इठलाते,बलखाते,उन्मुक्त बहनेवालीमीठे जल की मल्लिका निर्झरणी,सागर से जा मिली,कभी पूछना!कभी पूछना उसनेउस […]

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Kya Chand bhi kabhi Rota hoga/क्या चाँद भी कभी रोता होगा!

कीमती वस्त्र,आभूषणचेहरे पर रेशमी घूंघट,और घूँघट से झलकता चाँद देख,पुरुष क्या,नारियाँ भी आहें भरती होंगी,कैसा होगा उसका बिछौना,कैसा होगा घर,वाह!क्या किस्मत पाई है,निश्चित ही मखमल पर सोती होगी,कौन सोचता होगा उसे देखकर,कि वह भी कभी रोती होगी।दिनभर की उलझनों से इतर,निशा के अंधेरे में,दरवाजे को बंदकर,तकिए में मुँह दबाए,ताकि रोने पर कोई सिसकी ना सुन […]

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ADI GURU SHANKRACHARYA/आदिगुरु शंकराचार्य

सागर को गागर में भरना,मुश्किल कैद गगन को करना,नामुमकिन तारों को गिनना,मैं गिनकर दिखलाऊँ कैसे,परमपूज्य गुरु आदि शंकराचार्य की कथा सुनाऊँ कैसे।गांव कालड़ी,केरल का वहब्राम्हण का कुल धन्य,धन्य धरा वह माटी जिसपरहुआ गुरु का जन्म,हर्षित माँ आर्यम्बा,शिवगुरु पिता,संग पेरियार नदी,उस बालक से अनजाना जग,मगर नही अनजान महि,हर्षित ऋतु,प्रभंजन कैसे,वन हर्षित उपवन तब कैसे,कैसा हर्षित व्योम […]

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