Yaaden
जिंदगी रहे ना रहे लेख रह जाएंगे,
मेरे और आपके कमेंट्स रह जाएंगे,
नफरत की आग जला देगी जमाने को,
मेरे और आपके संदेश रह जाएंगे।
माना कि आपसे कोसों हैं दूर हम,
सच है कि आप भी हमसे है दूर मगर,
अपनी ये लेख मगर पास हमे लाएंगे,
मेरे और आपके कमेंट्स रह जाएंगे।
कुछ लेख प्यारे हैं,कुछ हैं रुलाते,
कुछ लेख ऐसे जो दिल को दुखाते,
बंधे हैं हम सब धर्मों की डोर में,
इंसाँ हैं हम बंधे जाति की डोर में,
जाति और धर्म मे लड़ते रह जायेंगे,
नफरत और प्रेम को समझते रह जाएंगे,
मेरे और आपके कमेंट्स रह जाएंगे।
जहां-जहां प्रेम वहीं नफरत और छल है,
सदियों से आजतक दोनों हर पल है,
समझा है कौन जहाँ,हम भी छोड़ जाएंगे,
मेरे और आपके कमेंट्स रह जाएंगे।
मेरे और आपके ये लेख रह जाएंगे।
!!! मधुसूदन !!!


sir ji wordpress se kaam Karta Hai metalv wordpress se hum kya sakte Hai
soory likhne m mistake ho gai
Koyee baat nahi.
Mere samajh se wordpress ek platform hai…jahaan hm apni supt padi kuchh bhaawnaao ko byakt kar hain saath hi wah kab kavita ya kahaani ban jaataa hai ham nahin jaante.rahi baat faayde ki to ye ham bhi nahi jaante.bas jab bhi khaali rahte hain faaltu sochne se achchha likhna chahte hai….bas ….
nice thought sir
nice poem sir
Sukriya Rishi ji…
Bahut sundar sir ji
Dhanyawaad apka pasand karne ke liye.
सत्य वचन।
धन्यवाद—स्वागत आपका।
बहुत सुंदर भाव. सुंदर रचना.
धन्यवाद आपका।
बहुत शानदार लिखा आपने जी
ह्रदय के अहसास कलम से निकल जब लिख जाते हैं तो अमर हो जाते हैं मधुसुदन जी
सुक्रिया—-विचारों के साथ होने के लिए।धन्यवाद आपका।
सही लिखा है जिंदगी रहे या ना रहे यादें रह जायेगी 👍👍
हां जी—धन्यवाद आपका पसंद करने के लिए।
Waah sir
धन्यवाद आपका।
Mere aur aapke comments reh jaenge….😀😀
धन्यवाद —आपका —स्वागत।
Bhut khub
सुक्रिया आपका।