HAHAKAAR
क्यों बैठे हो मन को मार, नई नही ये हाहाकर, सदियों से देखी धरती माँ,अनगिनत ही अत्याचार। खून की नदियाँ बहुत बही है, ऋषियों की इस धरती पर, एक से बढ़कर एक दुष्ट, पहले भी आये धरती पर, सत्य ढका कुछ पल को फिर, दुष्टों में मच गई चीख पुकार, क्यों बैठे हो मन को […]
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