Yaaden
मैं हूँ,मैं नहीं भी हूँ, परन्तु, तुम ही तुम हो, मैं जहां भी हूँ। अजीब हैं येे यादें, आती है सबकुछ, डूबा जाती है, गिरता हूँ, सम्हलता हूँ, फिर तेरी यादों की, दरिया में उतर जाता हूँ। गलती हुई है, नादानी कर बैठा, कभी निकला नहीं घर से, तभी तो, रेगिस्तान को, समन्दर समझ बैठा, […]
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