Anndaata/अन्नदाता
गोरे बदन जब काले हो जाते, तन पर के कपड़े भी चिथड़े हो जाते, सूरज की ताप जब हार मान जाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है। खेतों में पौधों को सींचता है ऐसे, थाली में मोती सजाता हो जैसे, खून-पसीने से फसल जब […]
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