AYE KAISA NPR/ये कैसा एन.पी.आर?

शोर चहुँओर तड़प,चीख और पुकार, किंकर्तव्यविमूढ़ जन,ये कैसी तकरार? ये तेरा एन.पी.आर,ये मेरा एन.पी.आर! युग बदल गए कई ना घटती आफतें, मकड़ियों सी जाल बुन रही सियासतें, जब भी बढ़ा दर्द बेबसी में रो दिए, स्वांग आँसुओं का दिखाती सियासतें, अबतलक समझ सके ना हमने टोपियाँ, अश्क भरे नैन,दम्भ में है टोपियाँ, जल रही धरा,कफ़न […]

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ALGAAV/अलगाव

हम झूठे नही,मगर कभी-कभी झूठ भी बोलते हैं, जानते हैं,तुम सच कभी सुन नहीं सकते, और हम तेरे वगैर जी नही सकते, जी भी लूँ तो कोई वजूद नही। बहुत कुछ मिट गए तेरे-मेरे दरमियाँ, मगर एक चीज आज भी जिंदा है, तुम कभी जिद्द नही छोड़ते जुदा होने की और हम, कभी उम्मीद नही […]

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CAA-NRC

Image Credit : Google CAA-NRC कानून सच में बुरा है, या सिर्फ विरोध करने का हथियार है, कारण जो भी हो मगर वतन झुलस रहा और नेताओं की बहार है। मगर इन सबके के बीच झारखंड अभी गौण है, वोट बैंक एकतरफा ना हो जाए शायद डर से विपक्ष अभी मौन है, मगर क्या जलता […]

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PUNAH DADHICHI BANANAA HOGA/पुनः दधीचि बनना होगा

Image Credit : Google हे भारत के लाल जगो तुम, माता का संताप हरो तुम, हे राणा,चौहान,शिवाजी के अनुचर अब जगना होगा, वित्रासुर गर्जन करता बन पुनः दधीचि जलना होगा। शूल भरी हो डगर, धधकती दावानल की ज्वाला हो, या जलजला हो राहों में या घोर घिरी अंधियारा हो, तुम पुरुषार्थी थम मत जाना, अभिमन्यु […]

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UN-EXPECTED/अप्रत्याशित

Image Credit : Google मैंने ख्वाबों में भी ना ये सोचा कभी, इस तरह पास आओगे तुम, पास आकर लगाकर गले से मुझे, इस तरह भूल जाओगे तुम। हम अंधेरे में लाखों जलाए दिए, फिर भी रौशन नही ये निशा है, तूने ख्वाबों में भी क्यों ना सोचा कभी, तेरे बिन मेरी दुनियाँ कहाँ है, […]

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DECEMBER/दिसम्बर

Image Credit : Google कौन रहा है कौन रहेगा, कबतक चिंतित,मौन रहेगा, सबका है किरदार सुनिश्चित, जीवनभर संग कौन रहेगा, तुम बड़भागी खुद को कहना, कभी ना खुद को दीन समझना, देख मनाया जश्न कभी उसका क्षण अंतिम आया है, मगर तुम्हारे जीवन में,एक और दिसम्बर आया है, देख तुम्हारे जीवन में,एक और दिसम्बर आया […]

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ANDHI HUN/आँधी हूँ

आँधी हूँ,शायद तुम्हें यकीन नही है, डरो मत,तेरा पुत्र कोई तृण नही है, राहों का पत्थर कब रोका तूफानों को, रोक ले हमें,ऐसा कोई तुंग नही है। माँ मेरे पाँवों को कोमल ना कहना, कँधों को नाजुक ना मेरे समझना, नजरों में झाँक देख जज्बे भरे हैं, हौसले बुलंद सफर में चल पडे हैं, डरते […]

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MAUN/ मौन!

Image Credit Googl संसद मूक, सिंघासनाधीश-प्रजापालक मौन, स्वयं को सहनशील बोल शोर मचानेवाले वुद्धिजीवी मौन, जिन्हें देख मौन थी लेखनी,शब्द स्तब्ध, मैं क्या लिखता? क्या हमेशा की तरह नारियों पर होते जुल्म की दास्तान लिखता, तड़पती बेटियों की चीख,पुकार लिखता, या कापुरुषों की जमात में खड़े, खुद को धिक्कार लिखता मैं क्या लिखता? आखिर मैं […]

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