Jimmewar Kaun/ जिम्मेवार कौन ?

Image Credit : Google. आजादी के पहले आई, आजादी पर धाक जमाई, वर्षों तक सत्ता में रह क्यों भी ना समझ में आई कांग्रेस आई ? किसने तेरी ये है ऐसी हाल बनाई कांग्रेस आई ? खाकर हर घर रोज रोटियाँ बासी कुछ बच जाते हैं, जिसको गाँवों में हम कुत्ते,कौवे को दे आते हैं, […]

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YOGYA KAUN? योग्य कौन?

Image Credit : Google सदियों से बेबस और लाचार कोई है तो वो कोई और नहीं बल्कि हम जनता ही हैं, जब राजतन्त्र था तो ज़ुबान पर ताले जड़े थे, हमें कुछ बोलने नहीं दिया, लाखों कुर्बानियाँ दी जनतंत्र लाए सुना था जनतंत्र जनता का शासन है, मगर हमें टुकड़ों में बाँट,यहाँ जनता रहने नही […]

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HALCHAL/हलचल

Image Credit :Google संसद की गलियों में हलचल जंग गजब की जारी, मौन बेचारी जनता, उलझे बंटवारे में सीटों के विपक्ष और सत्ताधारी, गौण बेचारी जनता। ना दुश्मन ना दोस्त यहाँ पर सब मतलब के साथी, राजनीत में कहने को बस धुर-विरोधी पार्टी, देख चील्ह-कोयल जस बोले, शेर के संग में गीदड़ डोले,है ये रीत […]

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CHOWKIDAR/चौकीदार

Image Credit : Google अचरज में संसार पड़ा है,तत्तपर चौकीदार जी, दुश्मन सीमा पार डरा है,तत्तपर चौकीदार जी, दहशत में गद्दार पड़ा है,तत्तपर चौकीदार जी, चोरों का सरदार डरा है,तत्तपर चौकीदार जी। दौड़-दौड़ कर शोर मचाते, सब चोरों को साथ मिलाते, मूर्ख समझकर जन-जन में वो, चौकीदार को चोर बताते, मुश्किल है हमको फुसलाना,हम हैं […]

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SABOOT CHAHIYE/सबूत चाहिए !

Image Credit :Google अयोध्या से कई गुना खूबसूरत लंका जिसके राजा रावण द्वारा बार-बार अनुनय,विनय एवं धमकाने के बावजूद भी जिस माँ सीता ने उसको एवं इसके राज्य को धूल समान माना उसी सीता पर कुछ अपनों ने कल लांछन लगा प्रभु श्रीराम से उनकी पवित्रता का सबूत मांग लिया,नतीजा प्रभु श्रीराम को जनता की […]

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PULWAAMA/पुलवामा

Image Credit : Google किसी की बगिया वीरान हो गयी, चेहरे से किसी की मुस्कान खो गयी, मतलब नहीं दर्द कैसा किसी को, पुलवामा भी सत्ता के नाम हो गयी| अचरज नहीं ना कोई गम हमें है, मिटे थे मिटेंगे यही प्रण किए हैं, सिंघासन मुबारक,वतन हमको प्यारा, उन्हें क्या खबर कौन बिछड़ा हमारा, जख्म […]

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Smart City/स्मार्ट सिटी

Image Credit : Google झोपड़ी रहे ना रहे स्मार्ट सिटी बनाएंगे, पटरी पुरानी है तो क्या हुआ, बुलेट ट्रेन दौड़ाएंगे…… cont. click here “Hamen kisi parti se bair nahi…..mere najar men sab ek samaan hain ….matlab… soch sabki ek jaisi hai.”

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SINGHASAN/सिंघासन

Image Credit : Google खाली होने को है सिंघासन,गजब की जंग जारी है। जनता से मतलब किसे,सिर्फ सत्ता सबको प्यारी है। देख घोटालेबाज भी,ईमानदार खुद को कहते हैं, सिद्धान्तहीन होकर भी सिद्धांतवादी बना करते हैं, जिधर देखो ऐसे ही योद्धा मैदान में खड़े हैं, जिसे देखो वही गठजोड़ में लगे हैं किसे मतलब वतन से, […]

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DAHSHAT KAISI JANGAL MEN..?

हिरण के संग शेर चला है, चीते के संग भेड़ चला है, चले संग कीटों के गिरगिट दहशत कैसी जंगल में। चले एक पथ चीते-भालू हलचल कैसी जंगल में। जंगल का कानून अचंभित, बना बाघ भी कैसे पंडित, नेवले के संग विषधर कैसे संग चले हैं जंगल में, चले एक पथ चीते-भालू हलचल कैसी जंगल […]

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Bahrupiya kahun yaa Paalanhaar/बहरूपिया कहूँ या पालनहार

Image Credit:Google धर्म नहीं है प्यारा कोई जात नहीं है प्यारी, हम ये जानते हैं, क्या है चाल तुम्हारी सब पहचानते हैं। तेरा बस एक ख्वाब सियासत करना है, जैसे भी हो सिंघासन पर रहना है, खुली आँख या पलके बंद,अंतर्मन में चलता द्वंद्व, कैसे अपनी क्षुधा मिटाएँ,कहीं निकल ना जाए दम, उलझ गए रोजी-रोटी […]

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Itihas aur Rajneet/इतिहास और राजनीति

Image Credit :Google राजनीत का नियम नहीं कुछ, ना रिस्ते ना मजहब हैं कुछ, राजनीत की वेदी पर बलि इंसानों को चढ़ते देखा, हाँ मैं हूँ इतिहास स्वयं को पल-पल यहाँ बदलते देखा। कभी सत्य तो कभी कल्पना, कभी कहानी किवदंती, कभी रक्तरंजित तलवारे, जबरन गाथा को रचती, कभी कोई आक्रांत बना तो, धर्मस्थल को […]

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Helpless Pen

लोकतंत्र का मंदिर संसद,पत्रकार स्तंभ, ऊपर से मजबूत,जीर्ण हैं भीतर से ये खम्भ। मानवता का नाम जुबाँ पर, मानव से क्या काम, अपनी-अपनी ख्याति में सब, भूल गए इंसान, धर्म बना है आज एजेंडा,आंखें हैं अब नम, ऊपर से मजबूत,जीर्ण हैं भीतर से ये खम्भ। चीख रहा है कोरा कागज, कलम गुहार लगाता, शब्द तड़पता […]

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HAA HAM JANTA HAIN

Image Credit Google हम जनता हैं, वैसा ही जैसा कल थे, मगर अपनी व्यथा किसे सुनाएँ, कुर्बानी तो हमने भी दी थी, मगर जख्म किसे दिखाएँ, हम कल भी रोते थे, आज भी तड़पते हैं, तेरे नियमों की चक्की, सदियों से पिसते है, आदत सी हो गई है, कल ताकत का दौर था, राजतंत्र था,तब […]

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ANDHAARAAJ/अँधाराज

Image Credit :Google तड़पते लोग जन्नत में गजब का देश मेरा है, तपोभूमि जो ऋषियों की वहाँ छाया अँधेरा है। जहाँ मीठे नदी,झरने जहाँ थी बोल में अमृत, वहीं विषाक्त जल,वाणी,हुआ नफरत का डेरा है, तड़पते लोग जन्नत में गजब का देश मेरा है। जिसे देखो वही अब स्वार्थ की धूनी रमाते है, सिंघासनरूढ़-पालक गीत […]

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Kaisi Siyaasat/कैसी सियासत

ना सबूत ना गवाह,सिर्फ शिकायत, और सीधे गिरफ्तारी, वाह रे मोदी जी, ये तेरी कैसी सियासतदारी। इससे तो अच्छा होता, ना अदालतें होती ना जज,सीधे सजा सुनाई जाती, सवर्ण होना क्या कम गुनाह है, सीधे फाँसी चढ़ाई जाती, बहुत पहले माँ ने,एक कहानी सुनाई थी, बच्चा था फिर भी प्रत्येक लफ्ज समझ में आई थी, […]

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AAYE PHIR SE NETAJI

हाथ जोड़कर मीठा बिष आया अमृत में घोलने, देखो जी,देखो जी,देखो आया फिर से तोड़ने।। बेमतलब की बात करेंगे केवल फिर तकरार करेंगे, कहीं माँग ना दे अपना हक, मुद्दों की बरसात करेंगे, फिर से मंदिर गान बजेगा, जात-पात परवान चढ़ेगा, तरसेंगे कुछ हक पाने को, आरक्षण का मान बढ़ेगा, जिसकी लाठी भैंस उसी की […]

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DUDH KA DAANT/दूध का दाँत

Image credit : Google जब तक दूध के दाँत थे मुख में फर्क नहीं जाना, ऊँच-नीच क्या जाति-धर्म सब अब है पहचाना। आज समझ में आया बचपन, में ही दुनियाँ सारी थी, छोटा सा खलिहान खेल की, जन्नत,जान हमारी थी, असलम,मुन्ना,कलुआ,अंजू, मंजू सखा हमारी थी, बिन बैठे एक साथ चैन ना, रातें भी अंधियारी थी, […]

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