Daldal si Rajneet
कैसी है आजादी जहाँ,आज भी बिबसता है, दलदल बना जाति,धर्म रोज कोई मरता है।। कहीं छुआ-छूत आज, दंगा कही धर्म का, बीते कई दशक मिला,मरहम नहीं मर्ज का, ज्ञान है अपार कोई बेच रहा साग है, बेजुबान प्राणियों सा बुरा उसका हाल है, कैसी सरकार चली देख धनानंद की, राजतंत्र लौट गयी देख परमानंद […]
