Dustak

बिखर कर भी प्रेम बिखर नहीं पाता है, संवर कर भी स्वार्थ संवर नहीं पाता है, खुशबु बिखेरे मिटकर फूल दुनिया में, कांटे फूल पाकर भी महक नहीं पाता है, बिखर कर भी प्रेम बिखर नहीं पाता है। जिंदगी तो दौड़ है स्वार्थ और प्रेम का, रिसते हैं आँखों से अश्क स्वार्थ-प्रेम का, सिलवटें निशान […]

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Megha Ajaa Man Tarse

आसमान में गरज रहा क्यों मेघा रे, तेरी धरती प्यासी प्यास बुझा जा रे| नजरों से था दूर याद मैं करती थी, रात-दिन आने की राह निरखती थी, पास में आकर दूर समझ ना पाऊँ मैं, अपनी दर्द को कैसे अब दिखलाऊँ मैं, आँखमिचौली धुप से खेल ना मेघा रे, तेरी धरती प्यासी प्यास बुझा […]

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