Armaan

प्रेम तो बहती नदियों जैसा, पर वैसा हम जीव नहीं, प्रेम तो करते बृक्ष मगर हम, वैसा भी निर्जीव नहीं, प्यास लगे तब क्षुधा मिटाएं, फल,फूलों से प्यारे करें, जब मर्जी तब उसे मसल दें, ये कैसा फिर प्यार करें, ऐसे स्वार्थ से घबराता दिल,मोम है ये पाषाण नहीं। प्रेम के बदले प्रेम चाहते, इंशां […]

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