KISAAN KAA JEEVAN
भूख मिटाता कृषक जगत का,क़द्र ना उसका जाना रे, सदियाँ बीत गयी कितनी इंसान उसे ना माना रे| अतिबृष्टि और अनाबृष्टि के, साथ में लड़ता रोज किसान, मानसून भगवान् है जिसका, उसी ने कर दी मुश्किल जान, बिकसित देश की रेस में हम है, मंगल,चाँद की रेस में हम है, धड़कन बसती देश का जिसमें, […]
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