Saathi Re

जबसे मैने होश सम्हाला, कदम गली में पहला डाला, कंधे पर जो हाथ पड़ा बन बैठा साथी रे, भूल नहीं सकते यारा,है याद सताती रे। याद हमें पत्थर की गोटी, याद है गिल्ली-डंडा, याद हमें वह साथी, जिसके साथ में खेले अंटा, लुक्का-छिपी,चोर-सिपाही, याद है खेल कबड्डी, भूल नहीं सकते वो साथी, जो बचपन का […]

Posted in Jiwan dhara30 Comments on Saathi Re