Kimat Brikshon ka
कह पाता ना शब्द उसे, तस्वीर बयाँ कर जाती है, जुल्म हुए हैं कितने सब,हालात बयाँ कर जाती है। दर्द न समझा बेजुबान का, आरे से तन चीर दिया, तड़प-तड़प कर पत्तों ने उसके आगे दम तोड़ दिया, मत मारो ऐ मानव मुझको, कितनी बार कहा होगा, तेरी श्वांस सहारा हूँ मैं, रोकर बतलाया होगा, […]
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