Jindagi ke Rang 

जीवन है सतरंगी आ संग,इसके जश्न मनाले, एक-एक खो जाएंगे फिर,जो भी साथ हमारे। हाथ मे आया और कब खोया, लट्टू,गीली-डंडा, खेल कबड्डी कब आया, कब खोया हाथ से अंटा, पता नही कब कलम मिली कब छूट गया विद्यालय, पता नहीं कब यौवन आयी, कब आया मदिरालय, होठों से कब जाम लगा,साकी थे साथ हमारे, […]

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