Rakhi ki Laaj

पाँच-पाँच पतियों की रानी, पाँचो वीर सेनानी, आज तड़पती है,बीच सभा एक रानी, आग बरसती है,आँखों से बन पानी, आज तड़पती है,…..। भूल गया देवर दुर्योधन, अपनी सब मर्यादा, दुशासन से गरज के बोला, मौन सभी थे राजा, जाओ केश पकड़कर लाओ, बीच सभा पांचाली, मेरी जंघा पर बैठाओ, खोल दो उसकी साड़ी, खेल की वस्तु […]

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