Maa Bharti

हैं दोनों ही संतान मेरे, एक वे भी हैं एक तुम भी हो, हो दोनों ही अरमान मेरे,एक वे भी हैं एक तुम भी हो। एक खून की होली खेल गए, जंजीर गुलामी तोड़ गए, माँ के आंसू के बदले में, हंसकर शूली पर झूल गए, एक रोज रुलाया करते हैं, अपनों पर हमला करते […]

Posted in Desh BhaktiTagged 39 Comments on Maa Bharti