Tarasti Ankhen/तरसती आँखें
मिटटी के खिलौने छूटे छूट गया संसार अपना बचपन का, कितना प्यारा था संसार अपना बचपन का। मिटटी के थे खेल खिलौने, हम भी मिटटी जैसे, मिटटी की गाडी लगती थी, सोने से भी अच्छे, पता नहीं कब दूर हुई, हमसे अमरुद की डाली, पता नहीं कब रूठा बचपन, आई जिम्मेवारी, आँखें ढूंढ रही अब, […]
