Kaisi Daud/कैसी दौड़
दौड़ लगी जीवन में कितने आगे, देखो निकल गए, सबकुछ है अब पास मगर, सुख चैन हमारे बिखर गए, खोज रहे अब ध्यान-योग में, कहाँ गया वह शांत ह्रदय, आज भी अबूझ पहेली जीवन, सुलझे हैं या उलझ गए । !!! मधुसदन !!!
दौड़ लगी जीवन में कितने आगे, देखो निकल गए, सबकुछ है अब पास मगर, सुख चैन हमारे बिखर गए, खोज रहे अब ध्यान-योग में, कहाँ गया वह शांत ह्रदय, आज भी अबूझ पहेली जीवन, सुलझे हैं या उलझ गए । !!! मधुसदन !!!
कैसा अपना हाल किया है, संकट जग पर डाल दिया है, आँखें खोल जगत को देखो, ऐ पागल नादान, बच्चा तरसे दूध को जग में पानी को इंसान, बच्चा तरसे दूध को देखो पानी को इंसान।। देखो मोर, पपीहा गाये, कोयल मीठी तान सुनाये, रंग बिरंगे पंछी मिलजुल, मानो स्वागत गान सुनाये, मन भावन फूलों […]