Bewfa Mat Kahna/बेवफा मत कहना
दुनियाँ की भीड़ में अल्हड़ थे,नादान थे,आसपास के लोग नादानियों से परेशान थे,उस अल्हड़ को पास बुलाया उसने,जिस खुशी से अनजान थे वो प्यार सिखाया उसने,हम सीखते रहे,वे सिखाते रहे,वे हंसते,हम मुस्कुराते रहे,उनका सानिध्य ऐसा,पतझड़ पर मधुमास जैसा,जेठ की दुपहरी जैसे चाँदनी,उनकी खिलखिलाहट जैसे रागिनी,प्रेम का उबाल था उनपर लुटाते रहे,धरती की प्यास,बन सावन मिटाते […]
