Kaisa Shasan/कैसा शासन

आहें,चीख कहीं सिंघासन, होता जश्न कहीं पर मातम, शासन जनता का है लोकतंत्र सब कहते हैं, फिर क्यों चीख रही है जनता नेता हँसते हैं। बंटे हुए थे जाति-धर्म में उस पर मुहर लगा दी है, सिंघासन के मतवाले, अमृत में जहर मिला दी है, चीखती जनता चलता भाषण, जलता देश मस्त सिंघासन, शासन जनता […]

Posted in PoliticsTagged 13 Comments on Kaisa Shasan/कैसा शासन

KAUN AAYAA GAON MEN

Image Credit :Google चिकने गाल पर दाढ़ी आई, हाथ में कुछ की लाठी आई, धूल जमी गलियों में उसे उडाए नेताजी, पाँच साल के बाद गली में आए नेताजी। ऐ चमना सुन खटिया लाना, तोशक रखा उसे बिछाना, दूध,मलाई कहाँ मयस्सर, लाल चाय ला इन्हें पिलाना, बैठ खटोला मन्द,मन्द मुस्काए नेताजी, पाँच साल के बाद […]

Posted in PoliticsTagged 17 Comments on KAUN AAYAA GAON MEN

RAAJNEET KA MARA DESH HAMARA

Image Credit : Google किसको चुनूँ किसको छोडूं, किससे अपने रिस्ते जोड़ूँ, पता किया तो निकल गए दोनों मौसेरे भाई, हम बकरे से बदतर इनसे अच्छे हैं कसाई। लोकतंत्र में जनता पर, निर्भर है सत्ताधारी, यहाँ खड्ग पर मत है भारी, मत का भेद करा डाला, जातिवाद बढ़ा डाला, जहाँ विश्व का धर्म सुरक्षित, उसमे […]

Posted in PoliticsTagged 34 Comments on RAAJNEET KA MARA DESH HAMARA

RAAJNEETI AUR INSAAN

Images Credit : Google. दलगत राजनीत आज अरमाँ को तोड़ दी, हिन्दू,मुसलमान संग रिश्तों को जोड़ ली, किसको परवाह यहाँ देश और मान की, हमने भी आज अब इंसानियत है छोड़ दी, हिन्दू,मुसलमान संग रिश्तों को जोड़ ली।1 चीख रहा हिन्द मगर बहरों का राज है, छलनी है अंग-अंग किसको परवाह है, जाति और मजहब […]

Posted in PoliticsTagged 26 Comments on RAAJNEETI AUR INSAAN

Tadapta Insan/तड़पता इंसान

Images Credit : Google कलेजा फट रहा माँ का कहीं मासूम रोता है, ये कैसा धर्म धरती का जहाँ भगवान सोता है। कहीं पर जात के झगडे, कहीं हम धर्म में उलझे, हुए बेसक बहुत विकसित, मगर दुविधा कहाँ सुलझे, उलझते नित गए नित अब यहाँ इंसान रोता है, ये कैसा धर्म धरती का कहाँ […]

Posted in PoliticsTagged 29 Comments on Tadapta Insan/तड़पता इंसान

Singhasan ke Matwale

Images credit : Google. बसकर अब ना तोड़ हमें,ऐ सिंघासन के रखवाले, नफरत अब ना घोल हमें ऐ सिंघासन के मतवाले|1 नफरत देखो बाँट रही है, मिलजुल सब सरकार, देख धरा को चाट रही है, अब तो जनता जाग, फैल गई है हममे तुममे, इसकी मायाजाल, देख सको तो देखो कैसी, मतवाले की चाल, अंदर,बाहर […]

Posted in Politics31 Comments on Singhasan ke Matwale

Siyaasat

दया नहीं धर्म कहां प्यार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। सपने,हंसी सब, पल भर का मेहमाँ, इंसाँ का ख्वाब, तार-तार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। दोस्त का दोस्त भी, दोस्त है जहान में, प्रेम दया धर्म सब, रहता इंसान में, दुश्मन का दुश्मन यहां यार होता है, मतलब सियासत […]

Posted in Politics33 Comments on Siyaasat

Insan aur Singhasan

Click here to read part ..3 तेरे ही कारण जग से यारा रार ठान ली, जब तूने ना समझा,अपनी मैं हार मान ली। मैं पत्थर से टकराता, जंगल मे राह बनाता, नामुमकिन है ना कुछ भी, मैं शोलों पर चल जाता, जग ने एक सुर से मेरी,जय-जयकार मान ली, जब तूने ना समझा मुझको मैं […]

Posted in PoliticsTagged 28 Comments on Insan aur Singhasan

Nafrat ki Aandhi

शंखध्वनि, घंटे, अजान के, सुर में दुनियां नाच रही है, अपनी डफली छोड़कर देखो,मानवता चित्कार रही है। हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई, सब कहते सब भाई हैं, अल्लाह,ईश्वर,गॉड,गुरु में, फिर क्यों छिड़ी लड़ाई है, आहत है इन्सान यहां, हर घर पर आफत आयी है, सत्ता का संघर्ष मात्र, वर्चस्व की छिड़ी लड़ाई है, कैसा रूप लिया मानव,किस ओर ये […]

Posted in PoliticsTagged 50 Comments on Nafrat ki Aandhi

Insan aur Sighashan(Part.3)

Click here to read part.2 तिनका तिनका जोड़ के कुटिया,एक बनाता है इंसान, जिसके सिर को छत मिल जाता,कितना इतराता इंसान। कितने ऐसे आज भी जिनके, सिर पर ऐसी घास नहीं, चलते चलते पैर थके, कितने को अब कुछ आस नहीं, आंखें बन जाती है पत्थर,ख्वाब नही पाता इंसान, जिसके सिर को छत मिल जाता,कितना […]

Posted in PoliticsTagged 21 Comments on Insan aur Sighashan(Part.3)

Insan aur Singhashan (Part..2)

Click here to read part..1 मैं एक अदना सा इंसान, सदियों से मेरी एक उलझन,रोटी,कपड़ा और मकान, मैं एक अदना सा इंसान। कर देकर भी मुक्त हुए ना, हम सब पहली बार, कोड़ों की बरसात हुई थी, हम पर पहली बार, नंदबंश का राजा था वह, धनानंद था नाम, मानव को मानव ना समझा, मुश्किल […]

Posted in PoliticsTagged 16 Comments on Insan aur Singhashan (Part..2)

Insan aur Singhashan(Part.1)

मैं एक अदना सा इंसान, जग में मेरी क्या पहचान, मेरी सदियों से एक उलझन, रोटी,कपड़ा और मकान,मैं एक अदना सा इंसान। राजतन्त्र या लोकतंत्र हो, या हो खेल सिंघासन का, जाति,धर्म या देश की सीमा, या हो खेल बिभाजन का, बातें सब ये बहुत बडी है, सदियों से इससे अनजान,मैं एक अदना सा इंसान। […]

Posted in PoliticsTagged 24 Comments on Insan aur Singhashan(Part.1)

SOCH/सोच

Image Credit :Google मुल्क वही इंसान वही,एक शोषित एक शासनकर्ता, बीत गयी सदियाँ फिर भी,ना हम बदले ना तुम बदला। जंग लड़े हैं हमने कितने,भूख कभी बिमारी से, देख रहे थे मरते बच्चे,बेबस और लाचारी से, बच्चों के हालात बदलने,सोच लिया रण में जाना, भूख से मरने से बेहतर है,गोली खाकर मर जाना, कब सुधरेगी […]

Posted in Politics63 Comments on SOCH/सोच

Bibas Insaan

हम कलि हैं बचा लो चमन के तेरे, वरना खिलने के पहले बिखर जाएंगे, हम भी हैं इस जहां की तुम्हारे वतन, तेरे क़दमों में सिर अपना रख जाएंगे ।। बस करो जातियों में ना बांटों हमें, धर्म का पाठ अब ना पढ़ाओ हमें, एक धरा,एक वतन,एक इंसान हम, प्रेम की हम किरण प्रेम की […]

Posted in PoliticsTagged 18 Comments on Bibas Insaan

Politics 

देश बुरा ना हम बुरे,ना बुरा है अपना संबिधान, राजनीत की चक्की में है,फिर भी पीस रहा इंसान। सत्तर साल की हुयी आजादी, क्या खोये क्या पाये हम, आओ देखें गुलशन अपना, क्या बोये क्या पाये हम, खेत बिना पानी के अब भी, मजदूरों का हाल बेहाल, बिद्यालय से शिक्षा गायब, बेरोजगार की लगी कतार, […]

Posted in Politics24 Comments on Politics