Waham/ वहम
ना लडनेवालो की कमी, ना लडानेवालो की,जंग एक बार कभी,ठानो तो सही।ढ़ूँढ़ रहे कहां दोस्त और दुश्मन,सब तो हैं तेरे घर में,चश्मा वहम का उतारो तो सही।दूर होते गए मंजिल,जो करीब थे कभी,मृग मरीचिका से स्वयं कोनिकालो तो सही,है वक्त प्रतिकूल,अनुकूल भी जरूर होगा,निकलेगा राह,निकालो तो सही,चश्मा वहम का उतारो तो सही। !!!मधुसूदन!!!
Shubhkamnayen/शुभकामनाएं
वो बातूनी है,बड़े दिलवाला भी,कलम का धनी,सबका दुलारा भी,सदैव हंसने,हंसाने वाला,जरूरत पर सबका साथ निभानेवाला,किसी अपरिचित को भीअपना बना लेने का हुनर उसमें,एकसूत्र में बांध रखने का निपुणता उसमें,उससे मिलते ही मिट जाते हैं गम सारे,हर्षित,गौरवान्वित हैं मिलकर उससे हम सारे,बिन फूलों के जैसे कोई बाग,वैसे ही वगैर उसके writer’s परिवार,उसे कोई shanky कहता कोई […]
KEWAL SIYASAT/केवल सियासत
जहाँ भी देखा वहीँ सियासत,तख्त,ताज में उलझे शासक,इनका कब ईश्वर से नाता,इनको सिर्फ सियासत भाता,मजहब-मजहब से लड़वाते,जाति-जाति में भेद कराते,कोई रंग हरा लहराता,कोई केसरिया दिखलाता,सबको केवल अस्त्र समझते,हम रोते जब, तब ये हँसते,इनके कब थे नेक इरादे,हम तो थे पहले से प्यादे,ढोंग है अल्लाह,ईश इबादत,इनका केवल धर्म सियासत|!!! मधुसूदन !!!
BULLDOZER/बुलडोजर
किसी का आलीशान मकान,किसी का चमकता दुकान, किसी का अम्बर ही छत,किसी का फुटपाथ ही सब, जो देता दो वक्त की रोटी,जो करता जुगाड़, बिटिया की शादी का,पढ़ाई का,दवाई का, जहाँ खो गया जीवन जिसका होकर, वो फुटपाथ रह गया आज,सिर्फ सियासत का ग्रास होकर, जिधर देखो उधर सिर्फ चलते बुलडोजर। देश कर रहा तरक्की, […]
MAA-BAAP/माँ-बाप
एक दौर था जब थकान किसे कहते मालूम नही था। कदम चलते नही,उड़ते थे। बाईस,तेईस की उम्र तब मैं दिल्ली में था। जहाँ एक वाक्या हुआ जिसने जीवन के कई सवालों के जवाब दे गए। मैं वहाँ किसी कम्पनी में काम करता था जहाँ हम नौजवानों के बीच लगभग एक साठ वर्ष के बुजुर्ग को […]
Murkh hain hum achchha hai/मूर्ख हैं हम अच्छा है।
जिनके पास दौलत अकूत,क्यों ना कमाए वेउसे चोरी और फरेब से,बुद्धिमान वही,मगर उन्हें सुकून कहाँ,ठहाके लगाते कब वे,माना हम मूर्ख,जिंदगी की लगी पड़ीमगर कल्पनाओं में खोए,यूँ ही अकारण निरंतर लिखते-पढ़ते,माना दौलत नही हमारे पास,मगर झूठे नही,ना ही मक्कार हम,सुकून से सोते,हँसते-हँसाते,हम औरों को रुलाते कब हैं,कब दिखाते अभाव,हम नीर बहाते कब हैं? !!!मधुसूदन!!!
TEDHE MEDHE RASTE/टेढ़े मेढ़े रास्ते
जिंदगी ये दौड़ चली,ख्वाहिशों को पंख लगी,है अनन्त दूर गगन,जिसको चूमने की लगन,पाँव चल पड़े निड़र,ना पूछ चल पड़े किधर,है नैन में मुकाम कई,सुप्त कई चाहतें,दिल में मगर अब भी वही टेढ़े मेढ़े रास्ते,वो टेढ़े मेढ़े रास्ते।राह वही जिस धरा ने ,बचपना सँवार दी,भूल जाऊँ कैसे जिसने इतना हमें प्यार दी,अब भी हर गली-गली में […]
TAPASYA
दिल की बगिया से हवा चली भावनाओं की,कण कण में जिसके सिर्फ तेरा नाममन लिखने को आतुर,देने को उत्सुकतुमकोकुछ पैगाम,दौड़ चली कलम,बरसने लगे शब्द,कोरे कागज़ देखते ही देखते रंगीन हो गए,सच कहें तो दर्द में मेरे गमगीन हो गए,तपस्या ही है,चाहतगुलशने-दिल महकाने कीजिसका लौट आना नामुमकिन,उसेवापस बुलाने की, उसे वापस बुलाने की।!!! मधुसूदन !!!
ANJAANA/अनजाना!
मुझसे भी मेरे दिल का खास,हुआ है कोई।मौसम संग बदले सारे ख्वाब,दुआ है कोई।आते वे पास,हम ना होते इस जहान में,एक साथ चाँद कई दिखते आसमान में,उनकी अदाएं,बातें,आँखें,मुस्कुराहटें,अस्त्र विचित्र,ध्वस्त गुरुर की इमारतें,खुले बज्र जैसे दिल के किवाड़,खुदा है कोई?मौसम संग बदले सारे ख्वाब,दुआ है कोई।कैसी ये रुत कैसी आई ये उमरिया,खुद से भी प्यारी लगे […]
KAISI CHAAHAT ? / कैसी चाहत?
बहुत हुआ अब हमको बाबर जैसा होना चाहिए, हमें भी गजनी,गोरी सा संहारक होना चाहिए।। बहुत भले थे खिलजी,लोधी और टीपू सुलतान, कासिम,तुगलक,मुगलवंश के शासक बड़े महान, कितने अच्छे कार्य किए कैसे उसको गिनवाऊँ, उनकी गौरवगाथा को किन शब्दों में दर्शाऊँ, तोड़ ध्रुव स्तम्भ बनाया कोई कुतुबमिनार, ढाई दिन का झोपड़ा में है दफन ज्ञानभंडार, […]
अफसाने तेरे पन्नों में…..!!!!
मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है कि मेरे प्रिय ब्लॉगर,मित्र,वर्डप्रेस के हमारे परिवार Shanky आशीष जी के सराहनीय प्रयास से हमारी 40 कविताओं वाली किताब जिसका नाम “अफ़साने तेरे पन्नों में” का प्रकाशन हुआ है। जिसमे आप सभी ब्लॉगर मित्र भाईयों का भी कम सराहनीय योगदान नही। अगर आप लोग हमारा निरन्तर हौसला […]
Vikas ya Vinash/विकास या विनाश
विकास रुक गई या विनाश,मुद्दतों बाद आसमान साफ,वृक्ष धूल मुक्त,शांत वातावरण,शोर मुक्त बयार,चिड़ियों के झुंड उन्मुक्त उड़ते,मनमर्जी सड़कों पर टहलते,ऐसी शांति को देखजंगली जीव भी हरकत में आए,जंगलों को छोड़ कुछ जीव मानो दूत बन,हमारा हाल देखने शहर को आए,मगर हमारा दुर्भाग्य देखो,चेहरों पर नकाब,अपनों के पास बैठना तो दूर,खुद का चेहरा छूना भी मुहाल […]
INTEJAAR/इंतजार
बहुत खूब दिल का लगाना तेरा, करीब आ के यूँ भूल जाना तेरा| हमें याद सब जो कही तूने बातें, कमल पंखुड़ी में भ्रमर की वो रातें, वो बातें बनाना,वो हाँथे घुमाना, बिना बात के यूँ तेरा मुस्कुराना, हमें याद अब भी वो आना तेरा, बिना बात के रूठ जाना तेरा। वो सूरत हमें याद […]
HOLI AAYEE/होली आई
रंगों का त्योहार आया,रंगों का त्योहार जी,अलग अलग रंगों में देखो डूब गया संसार जी।रंग कई हर एक का मनकुछ अलग ही सपने बोये से,कोई है चुपचाप झरोखे पर यादों में खोए से,किसी की भरी हुई पिचकारी,किसी की गालों पर है लाली,रंग न जाने जाति-मजहब,नफरत की दीवार जी,अलग अलग रंगों में देखो डूब गया संसार […]
Nafrat Ke Saudagar
नाम खुदा का रटते देखा,अल्लाह,ईश्वर जपते देखा,रटता जो गीता,कुरान उसको भी जहर उगलते देखा,हृदयहीन दानव था मस्जिद से मैं उसे निकलते देखा,हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों को चढ़ते देखा।कहते सब मंदिर रब बसते,मस्जिद सबसे पाक जगह है,अल्लाह,ईश्वर भजनेवालों का ये कैसा आज कहर है,हिन्दू-मुस्लिम हँसते देखा,इंसानों को मरते देखा,हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों […]
Delhi/दिल्ली
किसी के घर जले,किसी की गाडियाँ,किसी की जिंदगी की उड़ान छीन ली,वाह रे गंगा यमुनी तहजीब!ये तेरा कैसा प्रेम?जिसने किसी का एक ही सूरज था,वो इकलौती संतान छीन ली।हम इसे,तेरे हक की मांग कहें,आंदोलन,कोई षड्यंत्र,या तुम्हें गुमराह कहें,जहाँ धर्म देख घर और गाडियाँ जलाई जा रही थी,जहाँ पेट्रोल बम से घरों में आग लगाई जा […]
VIRODH/विरोध
Image Credit : Google शिक्षा हमारा अधिकार है जिसे जात-पात से ऊपर उठ प्रत्येक गरीब बच्चों को मुहैया करना सरकार का कर्तव्य। और जब जब सरकार की गलत नीतियों के कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटकने का भय सताएगा विरोध होता रहेगा। वैसे देखा जाए तो गरीब बच्चे देश के किसी एक शिक्षण संस्थान […]
निजीकरण (गिरवी)
Image Credit : Google एक किसान था। उसकी सम्पन्नता एवं किसानी के किस्से दूर,दूर तक विख्यात थी। लोग उससे किसानी के गुर सिखने आया करते थे। मगर उसके अधिकतर बच्चे कामचोर और आलसी निकले। वे आठ बजे सुबह उठते गप्पे हाँकते, दोपहर को खाते और पुनः सो जाते। एक दिन उस किसान की मृत्यु हो […]
LACHAARI/लाचारी
Image Credit : Google वाह रे तेरे वादे निर्धनता समझे लाचारी पान खिला फाँसी की कैसी खूब किया तैयारी। सदियों से झांसे में आकर हम पीछे पछताए हैं, लोभ में तेरे आकर हमनें खून के अश्क बहाए हैं, छले गए हम सदियों से सब समझ रहे मक्कारी, पान खिला फाँसी की तूने खूब किया तैयारी। […]
