Nafrat ki Aandhi

शंखध्वनि, घंटे, अजान के, सुर में दुनियां नाच रही है, अपनी डफली छोड़कर देखो,मानवता चित्कार रही है। हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई, सब कहते सब भाई हैं, अल्लाह,ईश्वर,गॉड,गुरु में, फिर क्यों छिड़ी लड़ाई है, आहत है इन्सान यहां, हर घर पर आफत आयी है, सत्ता का संघर्ष मात्र, वर्चस्व की छिड़ी लड़ाई है, कैसा रूप लिया मानव,किस ओर ये […]

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