BHUKH

सेज सजी मखमल की फिर भी नींद नहीं है आती, थाल सजी छत्तीस ब्यंजन पर भूख नहीं ला पाती। आह निकलती निर्धन की, उस ब्यंजन से उस बिस्तर पर, भूख लगे कैसे धनिकों को, नींद लगे फिर मखमल पर, महलों में ना चैन किसी को, ना सुकून मिलता है, देख सको तो देख लो, निर्धन […]

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Siyaasat

दया नहीं धर्म कहां प्यार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। सपने,हंसी सब, पल भर का मेहमाँ, इंसाँ का ख्वाब, तार-तार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। दोस्त का दोस्त भी, दोस्त है जहान में, प्रेम दया धर्म सब, रहता इंसान में, दुश्मन का दुश्मन यहां यार होता है, मतलब सियासत […]

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