TABLIGHI JAMAAT/तबलीगी जमात

मजहबी जलसा इंसानियत पर भारी हो गया,वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला हीभारत पर भारी हो गया।ताज्जुब नही हमें,चहुँओर होते शोर का,तेरे कुतर्कों,मुरखपन के जोर का,बेशक कातिल है तूँ फिर भी तुझे धर्म से जोड़,कई और तेरा साथी हो गया,वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला हीभारत की उम्मीदों पर भारी हो गया।जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना […]

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