VIPLAV/विप्लव

ये आहट प्रलय या कर्मों की सजा है,या कोई सबक या कयामत की निशा है।है क्या ये सबकी समझ से परे,शीतल हवा भी जहर से भरे,सूनी हैं सड़कें,गलियाँ वीराना,कैदी बना है ये सारा जमाना,क्रंदन,शवों में ये सिमटा जहाँ है,ये आहट प्रलय या कर्मों की सजा है।दिनकर किरण,चन्द्र की कौमुदी से,कैसा तिमिर ना डिगे इस महि […]

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