SANDESH/संदेश

कितने विवश थे सिंघासन और हस्तिनापुर से बंधेभीष्म,द्रोण,कृपाचार्य,अश्वस्थामा जैसेपरमशक्तिशाली महापुरुष,और महर्षि विदुर जैसेमहाज्ञानी भी,जो स्वयं को मिटा तो सकते थे, मगर अपने वचनों से पीछे हटना नामुमकिन।वे अपनी आँखों कुल का अपमान होते देखते रहे,गलत था दुर्योधन,पुत्रमोह से ग्रसित थे धृष्टराष्ट्र,शकुनि की कुटिलता,कर्ण की सोच,सब समझते हुए भी विवश,अधर्म संग रहते रहे,और अंत में वही […]

Posted in Dharm-ParampraTagged 49 Comments on SANDESH/संदेश