PATTHAR/पत्थर

मैं तुक्ष,राहों में बिखरा मामूली पत्थर,मर्जी तेरी ईश्वर मान मंदिर में स्थापित कर,महल बना या सेतु,मगरअरे हाड़-मांस के बनेसभ्य और संस्कारी मानव,मुझे किसी की हत्या का कारण मत बना,माना मैं निर्जीव बिना जान का,मगर तुझे क्या पता,तेरी खुशियों में मैं भी,खुश होता हूँ,और जबकिसी निर्दोष की हत्या में हमें,अपना साझीदार बनाता है,तो अरे बेखबर,औरों की […]

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