TAPASYA
दिल की बगिया से हवा चली भावनाओं की,कण कण में जिसके सिर्फ तेरा नाममन लिखने को आतुर,देने को उत्सुकतुमकोकुछ पैगाम,दौड़ चली कलम,बरसने लगे शब्द,कोरे कागज़ देखते ही देखते रंगीन हो गए,सच कहें तो दर्द में मेरे गमगीन हो गए,तपस्या ही है,चाहतगुलशने-दिल महकाने कीजिसका लौट आना नामुमकिन,उसेवापस बुलाने की, उसे वापस बुलाने की।!!! मधुसूदन !!!
