KANHA/कान्हा

मैं मानव हूँ क्षुद्र जनम से,ज्ञानेश्वर दो ज्ञान की शक्ति,हूँ पापी मैं सच जितना उतनी ही सच्ची मेरी भक्ति।ईर्ष्या,द्वेष,कपट,छल मुझमें,प्रेम सरोवर भर दो तुममैं कान्हा दुर्योधन जैसा,अर्जुन मुझको कर दो तुम,मैं हूँ क्षुद्र,नीच,पापी जन,सब माया तेरी यदुनन्दन,हे कृष्ण,हरि,कमलनाथ दे,इस माया से हमें विरक्ति,हूँ पापी मैं सच जितना उतनी ही सच्ची मेरी भक्ति।तेरा ही सब मैं […]

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“Every successful women”

महाभारत का युद्ध आसान था शायद,आसान था कल,मर्यादित रावण सेटकरा जाना,परन्तु आसान नही यहाँ नारियों का,ख्वाहिशों के पंख लगा अम्बर को छू पाना,जहाँ अब भी निराशाओं के बादलजलजला बन डूबाने को आतुरख्वाबों की नैया,जहाँ अपनों के ताने,दावानल बन झुलसाने को ततपरअरमानों की मड़ैया,जहाँ समाज का लोक-लाज,बन चट्टान ततपर रोकने को राह,जहाँ भीतर अपनों का अवरोध,बाहर […]

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PREM BHAYEE BAHAN KA/प्रेम भाई बहन का।

भागो जितना भाग सको तुम,मुश्किल प्रेम को नाप सको तुम,भागो हमसे दूर कहीं मैं अम्बर तक आ जाऊँगी,मैं चुड़ैल सब तेरी बलाय,नोच-नोच खा जाऊँगी।हर अस्त्रों में महाशस्त्र ये,क्यों ना कच्चे धागे ये,हँसी-खुशी और नोक-झोंक के,रिस्ते सच्चे प्यारे ये,बहना का भाई है गहना,इस रिश्ते बिन मुश्किल रहना,इन रिश्तों के लिए तेरे बीवी से भी टकराउंगी,मैं चुड़ैल […]

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SANTAAN/सन्तान

एक पूरब दूसरा पश्चिम,जिन्हें बाँध रखा,अपनी दोनों भुजाओं में,मैं  वो आपकाजादुई सामान हूँ,कहने को आपका छोटा बच्चा,जिसके दोनों गालों को पकड़ प्रेम से कहते,कबाब में हड्डी,मगर मैं ही आपदोनो का सारा जहान हूँ।मैंने मुस्कुराना सीखा,आपदोनो को हँसते मुस्कुराते देखकर,मैंने बोलना,गुनगुनाना सीखा,आपदोनो को बोलते,गुनगुनाते देखकर,मैं जीना सीख रहा,आपको जीवन जीते देखकर।मैं प्रतिफल हूँ,आपदोनो के प्रेम का,जो […]

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Khwahish/ख्वाहिश

हमारे एक प्रिय ब्लॉगर Padmaja ramesh जी की रचना से प्रभावित होकर लिखी गई रचना– विस्मृत ना होती यादें और पल गुजरे वापस आ आते,काश कि हम बच्चे बन जाते,काश कि हम बच्चे बन जाते।है ख्वाहिश फिर से पढ़ने की,यारों संग मस्ती करने की,था नही बदलना कुछ विशेष,करते जो छूट गया है शेष,नाना,नानी का सत्य […]

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Ummid/उम्मीद

मैं जैसे मरुस्थल में भटकता पथिक,भूख और प्यास से व्यथित,सूर्य का प्रचण्ड ताप,जहाँ ना कोई झुरमुट,ना कोई गाछ,जिस्म बेजान,निकलने को आतुर प्राण,टूटे दिल,टूटे सभी ख्वाब बीच,धोखे,झूठ,फरेब भरी दुनियाँ से टूटे विश्वास बीचबंधे जीवन की आसजब पड़े मेरे काँधे पर तुम्हारा हाथ,जब पड़े मेरे काँधे पर तुम्हारा हाथ।कभी दया,करुणा,प्रेम से भरे,अभी दर्द का सैलाब हूँ,कुछ भी […]

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KEWAL SIYASAT/केवल सियासत

जहाँ भी देखा वहीँ सियासत,तख्त,ताज में उलझे शासक,इनका कब ईश्वर से नाता,इनको सिर्फ सियासत भाता,मजहब-मजहब से लड़वाते,जाति-जाति में भेद कराते,कोई रंग हरा लहराता,कोई केसरिया दिखलाता,सबको केवल अस्त्र समझते,हम रोते जब, तब ये हँसते,इनके कब थे नेक इरादे,हम तो थे पहले से प्यादे,ढोंग है अल्लाह,ईश इबादत,इनका केवल धर्म सियासत|!!! मधुसूदन !!!

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BULLDOZER/बुलडोजर

किसी का आलीशान मकान,किसी का चमकता दुकान, किसी का अम्बर ही छत,किसी का फुटपाथ ही सब, जो देता दो वक्त की रोटी,जो करता जुगाड़, बिटिया की शादी का,पढ़ाई का,दवाई का, जहाँ खो गया जीवन जिसका होकर, वो फुटपाथ रह गया आज,सिर्फ सियासत का ग्रास होकर, जिधर देखो उधर सिर्फ चलते बुलडोजर। देश कर रहा तरक्की, […]

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वक्त बदलता है।

धीरे-धीरे मौसम बदलता,धीरे-धीरे लोग,कुछ भी यहाँ स्थिर नही,फिर किस बात का शोक।माना कल जो आज नही,जो आज रूबरू कल ना होगा,माना है तम आज चतुष्कोण,निश्चित तिमिर ये कल ना होगा,होगा फिर जयगान यहाँ पर,तेरा फिर गुणगान यहाँ पर,होगा निश्चित उदित भानु,दीप्ति होगी चहुँओर,कुछ भी यहाँ स्थिर नही,फिर किस बात का शोक।सूर्य भी उगता नित डूब […]

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JINDGI KE JAAL MAIN /जिंदगी के जाल में।

जिंदगी के जाल में,जिंदगी के जाल में,खुद लिखेंगे भाग्य जब भी होंगे विकटकाल में,जिंदगी के जाल में।ये जिंदगी है एक सफर,क्या पता कहाँ बसर,ये चलते चले पग निडर,ना पूछ चल पड़े किधर,कहीं सुगम डगर कहीं,मुशीबतों के तुंग थे,कभी भँवर के बीच कभी,जश्न के समुद्र थे,मैंने कई बार गिरा,गिरकर उठना है सीखा,वो बना यहाँ महान,उसकी होती […]

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कुछ बातें

दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को,बनकर आए जो हमराज,निभाने जीवन भर का साथ,वही जब पढ़ ना सके इन आँखों के जज्बात,बचा क्या कहने को,दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को।कलतक जिनके प्राण हमीं शहजादे थे,कोरे सारे कसमें झूठे वादे थे,दिए जो खुशियों की शौगात,दिए वे ही मातम की […]

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Mere Shyam/मेरे श्याम

जिनके होने से ही होती है विहान,वो मेरे श्याम साँवरे,जिनका नाम जपूं हर पल मैं शुबहों-शाम,वो मेरे श्याम साँवरे।प्रेममय थिरकती मीरा,मोहन मानो साथ में,दे दिया था प्याला विष का राणा उनके हाथ में,माहुर बना दिया था सुधा के समान,वो मेरे श्याम साँवरे,जिनके होने से ही होती है विहान,वो मेरे श्याम साँवरे।सन्धि का प्रस्ताव ले आये […]

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KALAM/कलम

जो लब से ना हम बोल सके,पैगाम उन्हें पहुँचा दो ना,ऐ कलम मेरी जज्बातों को,इन पन्नों पर बरसा दो ना।लिख दो धड़कन क्या कहती है,आँखें क्यों ब्याकुल रहती है,लब पर है किनके नाम मेरे,लिख दो सारे पैगाम मेरे,लिख नशा नही है लाखों में,जो नशा है उनकी बातों में,उन बातों में हम डूब गए,लिख दो खुद […]

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NASHA/नशा

नशे से भरी दुनियाँ,जहाँ कुछ नशा ऐसी,जो चढ़ती नही,और कुछ,चढ़ जाए फिर उतरती नही,चाहे क्यों ना लुप्त हो जाएँ सूरज,चाँद,सितारे,क्यों ना बुझ जाएं सारे दीप,हो जाएं क्यों नादुनियाँ से अलग,अकेला,जहाँ ना हो कोई रोकनेवाला,ना ही अपना कोई मीत,जहाँ घर क्या,भरा हो क्यों ना,तालाब भी महंगे शराब से,फिर भी नामुमकिन है उबर पानाउसके ख्वाब से।!!!मधुसूदन!!! अपने […]

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MAA AUR JINDGI/माँ और जिंदगी

जितना समझा,कम रहा,बस इन्हीं बातों का गम रहा,न जाने कितने तूफान आए,न जाने कितने पर्वतराहों मेंचक्रवात आए,मगरसदैव आगे बढ़ता रहा,तेरे हौसले,जिद्द मेंपल-पलनिखरता रहा,सबकुछ लुटा दी,मेरे एक मुस्कान पर,कितना समझाया तूनेहर गलत बात पर,ऐसे ही नही हर बार मझधार से निकलता रहा,सवाल कैसा भी होउलझतामगर हल करता रहा,सफल समझा सबने हमें,मगर आज भीस्वयं को मैंअनुतीर्ण समझता […]

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HOLI/होली

एक दौर था अभावों का,तब पकवान बामुश्किल बनते,और रंग खरीदने को पैसे भी कम थे,मगर होली का रंग कैसा? ये मत पूछना,बस उमंग ही उमंग थे, रंग ही रंग थे।तब बनती थी दोस्तों की टोलियाँ,टूट पड़ते उनपर जो छुपते,शर्माते,नजरों से बचना नामुमकिन,कौन ऐसे जो कोरे रह जाते,तब बजते ढोलक,झाँझघर-घर होली गाते,माना अभावों का दौर थामगर […]

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MAA-BAAP/माँ-बाप

एक दौर था जब थकान किसे कहते मालूम नही था। कदम चलते नही,उड़ते थे। बाईस,तेईस की उम्र तब मैं दिल्ली में था। जहाँ एक वाक्या हुआ जिसने जीवन के कई सवालों के जवाब दे गए। मैं वहाँ किसी कम्पनी में काम करता था जहाँ हम नौजवानों के बीच लगभग एक साठ वर्ष के बुजुर्ग को […]

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Murkh hain hum achchha hai/मूर्ख हैं हम अच्छा है।

जिनके पास दौलत अकूत,क्यों ना कमाए वेउसे चोरी और फरेब से,बुद्धिमान वही,मगर उन्हें सुकून कहाँ,ठहाके लगाते कब वे,माना हम मूर्ख,जिंदगी की लगी पड़ीमगर कल्पनाओं में खोए,यूँ ही अकारण निरंतर लिखते-पढ़ते,माना दौलत नही हमारे पास,मगर झूठे नही,ना ही मक्कार हम,सुकून से सोते,हँसते-हँसाते,हम औरों को रुलाते कब हैं,कब दिखाते अभाव,हम नीर बहाते कब हैं? !!!मधुसूदन!!!

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TEDHE MEDHE RASTE/टेढ़े मेढ़े रास्ते

जिंदगी ये दौड़ चली,ख्वाहिशों को पंख लगी,है अनन्त दूर गगन,जिसको चूमने की लगन,पाँव चल पड़े निड़र,ना पूछ चल पड़े किधर,है नैन में मुकाम कई,सुप्त कई चाहतें,दिल में मगर अब भी वही टेढ़े मेढ़े रास्ते,वो टेढ़े मेढ़े रास्ते।राह वही जिस धरा ने ,बचपना सँवार दी,भूल जाऊँ कैसे जिसने इतना हमें प्यार दी,अब भी हर गली-गली में […]

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TAPASYA

दिल की बगिया से हवा चली भावनाओं की,कण कण में जिसके सिर्फ तेरा नाममन लिखने को आतुर,देने को उत्सुकतुमकोकुछ पैगाम,दौड़ चली कलम,बरसने लगे शब्द,कोरे कागज़ देखते ही देखते रंगीन हो गए,सच कहें तो दर्द में मेरे गमगीन हो गए,तपस्या ही है,चाहतगुलशने-दिल महकाने कीजिसका लौट आना नामुमकिन,उसेवापस बुलाने की, उसे वापस बुलाने की।!!! मधुसूदन !!!

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