Rakhi ki Laaj
पाँच-पाँच पतियों की रानी, पाँचो वीर सेनानी, आज तड़पती है,बीच सभा एक रानी, आग बरसती है,आँखों से बन पानी, आज तड़पती है,…..। भूल गया देवर दुर्योधन, अपनी सब मर्यादा, दुशासन से गरज के बोला, मौन सभी थे राजा, जाओ केश पकड़कर लाओ, बीच सभा पांचाली, मेरी जंघा पर बैठाओ, खोल दो उसकी साड़ी, खेल की वस्तु […]
Saathi Re
जबसे मैने होश सम्हाला, कदम गली में पहला डाला, कंधे पर जो हाथ पड़ा बन बैठा साथी रे, भूल नहीं सकते यारा,है याद सताती रे। याद हमें पत्थर की गोटी, याद है गिल्ली-डंडा, याद हमें वह साथी, जिसके साथ में खेले अंटा, लुक्का-छिपी,चोर-सिपाही, याद है खेल कबड्डी, भूल नहीं सकते वो साथी, जो बचपन का […]
Sawan Bholenath ka
Click here to read part..3 आया सावन हम सब रहते जिसके इंतजार में, रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में। कदमताल में चले कांवरिया, सबके मनवाँ हरषे ला, ठंढी,ठंढी पवन चले संग, रिमझिम बदरा बरसे ला, गाँव,शहर हर जगह, शिवालय में भक्तों का मेला है, नर,नारी का प्रेम अलौकिक, सोमवार अलबेला है, गूंज उठा है […]
JEEVAN AUR SAMAAJ
Click here to read part..1 हमने छोड़ा सबअभिमान,तुम्हारा दास हो गया, सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया। उसकी प्रेम,गुजारिश,जिद ने, हर बंधन को तोड़ दिया, प्रेम के आगे बेबस बुलबुल, खिड़की दिल का खोल दिया, मद्धिम झोंका कब आंधी का, रूप लिया कुछ पता नहीं, बदल गयी दुनियाँ कब उसकी, कैसे कुछ भी […]
IJEHAAR PYAR KA
तेरा गुस्सा क्या मुश्काना सब कमाल हो गया, सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया। तुमको देखूँ लगता ऐसे, चाँद जमी पर आया जैसे, क्या तारीफ करूँ मैं तेरी, दिल का हाल सुनाऊँ कैसे, तेरे बादल जैसे बाल, डिम्पल दिखती हँसते गाल, मृगनयनी ये तेरी आंखे, जैसे झील हो नैनीताल, उसमे डूब गया मन […]
Sawan Mahima
Click here to read part..2 आया सावन हम सब रहते जिसके इंतजार में, रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में| कथा एक वेदों में वर्णित, उसको आज सुनाता हूं, एक माह सावन की महिमा, क्या है उसे बताता हूँ, इसी माह में देव-दनुज मिल, सागर मंथन कर डाला, रत्न कई निकले संग निकला, भरा हुआ […]
Intejaar Sawan ka
आया सावन हम सब रहते जिसके इंतजार में, रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में| नैन किसी की सावन के संग, झर-झर बहते रहती है, कब आएंगे बालम उसकी, पल-पल राह निरखती है, सखियाँ झूले नीम की डाली, गीत सुनाती सावन के, कोई सजकर द्वार खड़ी है, इंतजार में बालम के, साजन आये खुशिया लाये […]
Karaagrih
कारागृह में जन्म लिया, उसकी मैं कथा सुनाता हूँ, कृष्ण,कन्हैया,गोवर्धन भगवान की कथा सुनाता हूँ। सात-सात थे दरवाजे, जिनपर थे ताले जड़े हुए, एक से बढ़कर एक जहाँ पर, पहरेदार थे खड़े हुए, ऐसे कारागार में बन्दी, मात-पिता जंजीरों में, कैसा वह इंसान गर्भ में, क्या लिखा तकदीरों में, दुश्मन कैसा मथुरा का वह, शक्तिशाली […]
BHUKH
सेज सजी मखमल की फिर भी नींद नहीं है आती, थाल सजी छत्तीस ब्यंजन पर भूख नहीं ला पाती। आह निकलती निर्धन की, उस ब्यंजन से उस बिस्तर पर, भूख लगे कैसे धनिकों को, नींद लगे फिर मखमल पर, महलों में ना चैन किसी को, ना सुकून मिलता है, देख सको तो देख लो, निर्धन […]
Siyaasat
दया नहीं धर्म कहां प्यार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। सपने,हंसी सब, पल भर का मेहमाँ, इंसाँ का ख्वाब, तार-तार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। दोस्त का दोस्त भी, दोस्त है जहान में, प्रेम दया धर्म सब, रहता इंसान में, दुश्मन का दुश्मन यहां यार होता है, मतलब सियासत […]
Insan aur Singhasan
Click here to read part ..3 तेरे ही कारण जग से यारा रार ठान ली, जब तूने ना समझा,अपनी मैं हार मान ली। मैं पत्थर से टकराता, जंगल मे राह बनाता, नामुमकिन है ना कुछ भी, मैं शोलों पर चल जाता, जग ने एक सुर से मेरी,जय-जयकार मान ली, जब तूने ना समझा मुझको मैं […]
Nafrat ki Aandhi
शंखध्वनि, घंटे, अजान के, सुर में दुनियां नाच रही है, अपनी डफली छोड़कर देखो,मानवता चित्कार रही है। हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई, सब कहते सब भाई हैं, अल्लाह,ईश्वर,गॉड,गुरु में, फिर क्यों छिड़ी लड़ाई है, आहत है इन्सान यहां, हर घर पर आफत आयी है, सत्ता का संघर्ष मात्र, वर्चस्व की छिड़ी लड़ाई है, कैसा रूप लिया मानव,किस ओर ये […]
Insan aur Sighashan(Part.3)
Click here to read part.2 तिनका तिनका जोड़ के कुटिया,एक बनाता है इंसान, जिसके सिर को छत मिल जाता,कितना इतराता इंसान। कितने ऐसे आज भी जिनके, सिर पर ऐसी घास नहीं, चलते चलते पैर थके, कितने को अब कुछ आस नहीं, आंखें बन जाती है पत्थर,ख्वाब नही पाता इंसान, जिसके सिर को छत मिल जाता,कितना […]
Insan aur Singhashan (Part..2)
Click here to read part..1 मैं एक अदना सा इंसान, सदियों से मेरी एक उलझन,रोटी,कपड़ा और मकान, मैं एक अदना सा इंसान। कर देकर भी मुक्त हुए ना, हम सब पहली बार, कोड़ों की बरसात हुई थी, हम पर पहली बार, नंदबंश का राजा था वह, धनानंद था नाम, मानव को मानव ना समझा, मुश्किल […]
