Democracy

सज के सवंर के दुल्हन सा बनके, जनतंत्र आया दुनिया में हँसके, सोंचा था उसने गगन में उड़ेंगे, राजसी हुकूमत से ऊपर उठेंगे, मगर तख़्त को छोड़ कुछ भी ना बदला, मजहब और जाति में इंसान अटका। कहीं है लाचारी कही पर ग़रीबी, कहीं मौज मस्ती की छाई अमीरी, कहने को जनतंत्र जनता का शासन, […]

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Reservation

सदियों से गरीबों द्वारा अपने हक़ पर कब्जे की लड़ाई को सियासत द्वारा ऐसा जातिगत रंग दिया गया जिसने आज देश को दो धाराओं में बिभाजित कर गरीब को गरीब से ही लड़ा दिया जिसे देख आज बाबा साहेब भी अफशोष कर रहे होंगे, जिसे आरक्षण कहते हैं। आरक्षण एक ऐसा बिषय जिसपर कुछ भी […]

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Chaahat

देख हम जा रहे ये वतन छोड़कर,मौत की हमको कोई गिला भी नहीं, कैसी चाहत हमें थी किसे अब कहें, मौत वैसी हमें तो मिला भी नहीं| हम तरसते रहे जंग हम भी करें, गोलियों से कभी बात हम भी करें, कितनी ताकत है उसको दिखाएं कभी, मौत का खौफ दिल में जगाएं कभी, कितना […]

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Bhikhari

राम नाम को गाता जाए धुन में डफली बजा-बजा, दे दो रे दो पैसे बाबू, राम करेगा तेरा भला—2। सब लोगों के बीच में गाता, हाथ जोड़कर उन्हें मनाता, मिल जाते दो पैसे उसको, जिससे अपनी भूख मिटाता, जो भी समझा दर्द को उसके, आँख से आँसूं छलक गया, मानवता का चीख समझ, पाषाण ह्रदय […]

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Jiwan ki Udaan

दुनिया चमन है जीवन पवन है, उड़ने को जीवन का सारा गगन है, बंदिश में इसको ना रहने दो, जीवन पवन है बहने दो | लम्बी डगर है, छोटी उम्र है, मंजिल की जीवन में, सबको फिकर है, चिंता में इसको ना रहने दो, जीवन पवन है बहने दो | गर्मी गरम है, ठंडी नरम […]

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Majdoor Jag ki Shaan

Image Credit : Google सूटबूट है किसी के तन पर,कोई पहने फटी लिबास, सारे जग में दो जन देखे,सूट-बूट और फटी लिबास। मिहनत करता है जग सारा, सुटबूट और फटी लिबास, बाबू और मजदूर में बंट गये, सूटबूट और फटी लिबास एक गरजता सहता दूजा, सहता वह मजदुर बना, खून पसीने के बल उसके, ये […]

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