Kaisi Jindagi 

Image Credit : Google आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है, स्वेत वस्त्रों में,अरमान सुलग जाती है। तुम हो तो,साड़ी,गहने,कपडे है तुमसे ही दुनियाँ की मेरे सभी सपने है, जानती थी पर,किश्मत ना जान सकी, साबित्री थी पर खुद को ना पहचान सकी, क्या करें मजबूर थी,तुमसे कोसो दूर थी, आज सब कुछ है,बस […]

Posted in DILTagged 52 Comments on Kaisi Jindagi 

Dil ki Jajbaat

किसे बताएं, दिल की जज्बात, बेचैन हम। तरस रहे, रिमझिम वारिस, भींगे हैं हम। लौट के आजा, झमझम सावन, तरसे मन। बदली जैसी, पिघल के बरसी, पिघला मन। सतरंगी सी, सपनो की दुनीयाँ, तू सहजादा। याद सताये, मधुर मिलन की, शाम है आजा। दिल की बातें, समझ गया दिल, प्रेम की भाषा। भीगते आया, मानो […]

Posted in DILTagged 6 Comments on Dil ki Jajbaat

Kaash….Ek Kachot

जैसे थे हम अच्छे थे, वैसा ही रहने देते, जाति-धर्म,का भेद मिटा,कुछ प्रेम का तोहफा देते ||   याद है बचपन की सब बातें, साथ में खेला करते थे, हिन्दू-मुस्लिम,जात-पात का, मतलब नहीं समझते थे, घर में मिलती डांट सजा, हम कहाँ सुधरनेवाले थे, मिले नहीं गर सुबह कहाँ फिर, दिन गुजरनेवाले थे, घरवाले सब […]

Posted in Hamaara SamaajTagged 22 Comments on Kaash….Ek Kachot

Ansu/आँसूं

आँखों में दो बूंद है पानी,आंसू बनकर बहते हैं, उसको ना पहचान सके जो आँखों में ही रहते है।   किश्ती में हैं घूम लिया,सागर में उम्र गुजारा है, फिर भी देख मुशाफिर कैसे,सागर ना पहचाना है, समझ सका ना ख़ुशी है या फिर,जख्म जिगर में गहरे है, उसको ना पहचान सके,जो आँखों में ही […]

Posted in DILTagged 14 Comments on Ansu/आँसूं

Daldal si Rajneet

कैसी है आजादी जहाँ,आज भी बिबसता है, दलदल बना जाति,धर्म रोज कोई मरता है।।   कहीं छुआ-छूत आज, दंगा कही धर्म का, बीते कई दशक मिला,मरहम नहीं मर्ज का, ज्ञान है अपार कोई बेच रहा साग है, बेजुबान प्राणियों सा बुरा उसका हाल है, कैसी सरकार चली देख धनानंद की, राजतंत्र लौट गयी देख परमानंद […]

Posted in Desh BhaktiTagged 14 Comments on Daldal si Rajneet

Bibastaa

Image Credit :Google लोकतंत्र है विवश सिसकता देख तड़पता मानव पर, देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर। भूखी नंगी लोग सड़क पर उड़ती गड्डियाँ ठुमकों पर, तरस रहे हम छत को कब से नेता सोये मखमल पर, राशन कार्ड और सब्सिडी को लूट लिए महलोंवाले, दूध की नदियाँ सुख चुकी हर मोड़ खड़े […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 41 Comments on Bibastaa

Pukaar 

हूँ अबला,गरीब मैं,लोग मुझे सताते है, मेरे धर्मवाले मुझे बार-बार रुलाते हैं || मन में बिस्वास और उम्मीद लेकर आयी हूँ, थककर उस संसार से, तेरे दर पे आयी हूँ, आजा आके मुझको अपने गले से लगा लो, रश्मों के साथ मुझे हिन्दू तुम बना दो, रश्मों के साथ मुझे हिन्दू तुम बना दो |1| […]

Posted in UncategorizedTagged 18 Comments on Pukaar 

Adhure Khwaab

बरसों बाद उनको याद आयी गुलशने जिंदगी बहार आयी, चुप थे लब खामोश आँखे थी, कैसे उनको हमारी याद आयी।1 भूल से ओ गली में आ बैठे, या जलाने का कोई इरादा था, या तरस थी मेरी उनकी आँखों में, कैसे उनको हमारी याद आयी।2 सिलवटें जो निशान छोड़ा था, कतरा-कतरा को हमने जोड़ा था, […]

Posted in DILTagged 11 Comments on Adhure Khwaab

 Democracy

सज के सवंर के दुल्हन सा बनके, जनतंत्र आया दुनिया में हँसके, सोंचा था उसने गगन में उड़ेंगे, राजसी हुकूमत से ऊपर उठेंगे, मगर तख़्त को छोड़ कुछ भी ना बदला, मजहब और जाति में इंसान अटका। कहीं है लाचारी कही पर ग़रीबी, कहीं मौज मस्ती की छाई अमीरी, कहने को जनतंत्र जनता का शासन, […]

Posted in Desh BhaktiTagged 6 Comments on  Democracy

Reservation

सदियों से गरीबों द्वारा अपने हक़ पर कब्जे की लड़ाई को सियासत द्वारा ऐसा जातिगत रंग दिया गया जिसने आज देश को दो धाराओं में बिभाजित कर गरीब को गरीब से ही लड़ा दिया जिसे देख आज बाबा साहेब भी अफशोष कर रहे होंगे, जिसे आरक्षण कहते हैं। आरक्षण एक ऐसा बिषय जिसपर कुछ भी […]

Posted in Hamaara SamaajTagged 14 Comments on Reservation

Chaahat

देख हम जा रहे ये वतन छोड़कर,मौत की हमको कोई गिला भी नहीं, कैसी चाहत हमें थी किसे अब कहें, मौत वैसी हमें तो मिला भी नहीं| हम तरसते रहे जंग हम भी करें, गोलियों से कभी बात हम भी करें, कितनी ताकत है उसको दिखाएं कभी, मौत का खौफ दिल में जगाएं कभी, कितना […]

Posted in Desh BhaktiTagged 11 Comments on Chaahat

Bhikhari

राम नाम को गाता जाए धुन में डफली बजा-बजा, दे दो रे दो पैसे बाबू, राम करेगा तेरा भला—2। सब लोगों के बीच में गाता, हाथ जोड़कर उन्हें मनाता, मिल जाते दो पैसे उसको, जिससे अपनी भूख मिटाता, जो भी समझा दर्द को उसके, आँख से आँसूं छलक गया, मानवता का चीख समझ, पाषाण ह्रदय […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 6 Comments on Bhikhari

Jiwan ki Udaan

दुनिया चमन है जीवन पवन है, उड़ने को जीवन का सारा गगन है, बंदिश में इसको ना रहने दो, जीवन पवन है बहने दो | लम्बी डगर है, छोटी उम्र है, मंजिल की जीवन में, सबको फिकर है, चिंता में इसको ना रहने दो, जीवन पवन है बहने दो | गर्मी गरम है, ठंडी नरम […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 7 Comments on Jiwan ki Udaan

Majdoor Jag ki Shaan

Image Credit : Google सूटबूट है किसी के तन पर,कोई पहने फटी लिबास, सारे जग में दो जन देखे,सूट-बूट और फटी लिबास। मिहनत करता है जग सारा, सुटबूट और फटी लिबास, बाबू और मजदूर में बंट गये, सूटबूट और फटी लिबास एक गरजता सहता दूजा, सहता वह मजदुर बना, खून पसीने के बल उसके, ये […]

Posted in Labour Day26 Comments on Majdoor Jag ki Shaan

Z se Zero but Hero

अंतिम अक्षर Z हूँ मैं, अंग्रेजी अल्फाबेट का, सीमा रेखा जैसे खड़ा हूँ,जैसे कोई देश का।। अंतिम हूँ अंतिम ना मानो, इंसानो की दुनिया में, पलभर को इंसान समझ लो, इंसानो की दुनिया में, बना हमी से जिसकी भैल्यु, दुनिया कहती जीरो है, जिसने क़द्र किया जीरो का, बन बैठा ओ हीरो है, अनयुजुअल कतार […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 6 Comments on Z se Zero but Hero

Jeevan Darshan

Kahaani (edhar-udhar se) एक गावँ में आम का एक बिशाल पेड़ था जिसके छावँ में एक बच्चा प्रतिदिन खेलने जाया करता था | वह प्रतिदिन उसके डाल से लिपट-लिपट कर झूला झूला करता | धीरे-धीरे बच्चे से उस अनबोलते बृक्ष को प्रेम हो गया |अब वह प्रतिदिन उस बच्चे का बेसब्री से इंतेजार करता…..प्रेम इंतज़ार […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 20 Comments on Jeevan Darshan

Kaisi Bebasi

जश्न मना है मौत का ,क्रंदन से धरती-अम्बर डोला, लोकतंत्र की जड़े रक्त रंजित,ब्याकुल जन-मन बोला। कब तक शांत रहोगे तुम,शान्ति की बाते बोलोगे, जन मानस की कीमत कब तक,रेत बराबर तौलोगे, अश्रु की सैलाब में धरती का,आँचल अब भींग गया, हृदय विदारक चीख ने,अम्बर का भी सीना चिर गया, सहन की सीमा पार हुयी,ललकार […]

Posted in Desh BhaktiTagged 27 Comments on Kaisi Bebasi

Talaaq ek Abhishaap

सादगी से भरी, खुबशुरत परी, तेरी गुलशन की हूँ, मैं भी एक कली, देख मौला ये क्या हो गया है, मेरा जीवन सजा हो गया है, हाय जीने को अब क्या बचा है | कितना मिन्नत किया, अब्बा ने हाँ किया, फिर निकाह हो गयी, मुझको सौहर मिला, कितनी खुशियां थी कितने हसीं ख्वाब थे, […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 29 Comments on Talaaq ek Abhishaap

Apnaa Gaon

कितना प्यारा था अपना जहान यारो, कहाँ छोड़ आए अपना ओ गांव यारों । कितना भटके हैं हम,फिर भी तरसे है मन, हर ख़ुशी है मगर कितना तन्हा हैं हम, एक डब्बे में सिमटा जहान यारो, कहां छोड़ आए अपना ओ गांव यारो। आम अमरुद की डाली कहाँ खो गयी, देख होठों की लाली कहाँ […]

Posted in Hamaara SamaajTagged 19 Comments on Apnaa Gaon

Maut ka Saudaagar

देख मनुज निज आँखों से तूने कैसा जग कर डाला, अपनी हाँथों से खुद अपने, मौत का सौदा कर डाला, किन-किन पाप को माफ़ करे रब,कैसा पाप तू कर डाला, कुम्भकर्ण, रावण, दुर्योधन, कंस को पीछे कर डाला, अपनी हाँथों से खुद अपने, मौत का सौदा कर डाला | कितनी सूंदर जहां है ये जिसपर […]

Posted in Jiwan DarpanTagged 21 Comments on Maut ka Saudaagar